Nari लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Nari लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 20 दिसंबर 2010

दहेज़

किसने चलाया ऐसा चलन,
     किसने जलाया ऐसा हवन 
            जिसमे जले सिर्फ नारी  का तन,
                      जिससे   मिले न कभी भी अमन ||


दहेज़ के नाम पर, बोलो अभी तक,
   तुमने  दिया   किस -किस को कफ़न |
        कौन मिटेगा, कौन हटाएगा,  
                 बताओ मुझे क्या है, इसका जतन?


धूँ - धूँ  के स्वाहा हो जाएगा,  
एक दिन ये अपना ,सारा चमन |

                     करते  रहो मन, बेटी बहुओं को


                  ऐसे ही जमीं पे दफ़न | | 
                   


पर बुझाओगे फिर, किससे अपनी तपन,



    लूटोगे फिर किस पे, अपना ये धन ?


           पुकारोगे फिर किसको, अपनी बहन,



                     जब सूना ही कर दोगे, सारा चमन  ?? 
                       
                                          .................... 
            





सोमवार, 6 दिसंबर 2010

प्रश्न

कब तक करोगे इस धरती पर,
नारी का तुम यूँ अपमान ? 

क्या  ज्ञात नहीं !  तुमको मानव,
बल से ही बनता बलवान ?

उसकी ही शक्ति से तुम, 
बने हुए हो शक्ति-मान | 

जननी के अथक परिश्रम से ही,
प्राप्त किया ये कीर्ति-मान |

निज रक्त-सुधा से सिंचित करके,
बना दिया जिसने महान |

उसको ही अबला संबोधित कर,
मिटा रहे उसकी पहचान |

माना कि तुम परुष जाति हो,
पर इसका है क्यूँ अभिमान ? 

पुरुषत्व तुमारा कर्म नहीं,  
यह तो  स्रष्टि  का है विधान |

इससे अवलंबित होकर तुम,
कहते  हो खुद को क्यूँ महान ?

करोगे कब तक...........................?????