शुक्रवार, 27 मई 2011

तेरी खुशबू


भीगी  पलकें  


छलके    आंसू 


रोक  न  पाए 


अविरल  गिरते 


मौन  बनी 


 सब  सहके  भी 


"पर "


तेरी   खुशबू 


महके  क्यूँ ?


जब  नहीं  दीखते 


दूर -दूर  तक


"तो  "


मेरा  दिल 


दहके  क्यूँ ?
................

4 टिप्‍पणियां:

जीवन का उद्देश ने कहा…

Acchi koshish h, but try again to again to achieving batter than.

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत खूबसूरत अंदाज़ में पेश की गई है पोस्ट..... शुभकामनायें।

prritiy---------sneh ने कहा…

prem se bhari achhi rachna, padhna bhaya.

shubhkamnayen

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

bhaav poorn sundar rachna

aabhaar !!!